📰 सिंधी समाज – सत्ता की गंदगी और मानसिक गुलामी का खेल
📍 बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 📅 अगस्त 2025
सूत्रों के मुताबिक, यह कोई नई कहानी नहीं है….
2016 में किशोर कृपलानी ने सेन्ट्रल पंचायत चुनाव में गड़बड़ी का मुद्दा उठाकर चुनाव अधिकारी को लिखित शिकायत दी थी। लेकिन क्या हुआ ? कुछ नहीं! न तब किसी ने ध्यान दिया, न आज तक किसी ने। क्यों? क्योंकि जिनके हाथ में सत्ता है, वे इसे अपने “बाप की जागीर” समझकर बैठे हैं।
इन लोगों ने समाज को मूर्ख बनाया, लूटा और शोषण किया। संविधान और नियम किताबों में बंद पड़े हैं, और फैसले सिर्फ अपने चमचों और गुलामों के फायदे के लिए होते हैं। आम समाज को? कुछ नहीं मिलता—बस खोखले वादे और डर का माहौल।
सच सुनो— बिलासपुर के कुछ वार्ड अध्यक्ष तो इनका तलवा चाटने में लगे हुए हैं। बिना सवाल किए इनके गलत कामों में शामिल होते हैं। ये सिर्फ पद पर नहीं बैठे—ये मानसिक गुलामी का जाल बुन चुके हैं।
और डराने का तरीका ?
“बच्चों की शादी करवानी है या नहीं ?”
“व्यवसाय चलाना है या नहीं ?”
“हमारे खिलाफ बोलोगे तो समाज से बाहर कर देंगे !”
ये कोई कानून है ? ये भगवान हैं क्या ? या फिर सिर्फ डर का सहारा लेकर कुर्सी से चिपके हुए पुराने चेहरे ?
सबसे बड़ा सवाल— क्या पूरे सिंधी समाज में एक भी ऐसा इंसान नहीं है जो इनको चुनाव में सीधी चुनौती दे सके ? अगर नहीं, तो याद रखो—गुलामी तुम्हारी नसों में है, और ये लोग उसी का फायदा उठा रहे हैं।