*सिविल लाइन थाना प्रभारी पर पैसे के लिए पत्रकारों पर झूठी FIR कराने का आरोप, पत्रकारों में रोष*
बिलासपुर।. ✍️ रिपोर्ट : [ रोशन न्यूज़]
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक बार फिर पत्रकारों पर झूठी एफआईआर कर उन्हें निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सिविल लाइन थाना प्रभारी ने पैसे और दबाव के चलते कुछ पत्रकारों के खिलाफ बिना जांच के झूठी एफआईआर दर्ज कर दी।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनवरी माह में भी इसी थाने में एक महिला की शिकायत पर बिलासपुर के एक पत्रकार को झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजा गया था। तब भी कुछ रसूखदारों और नोटों के दम पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
क्या थाना के प्रभारी पैसे के भूखे है ?
पत्रकार ने उच्च अधिकारियों से शिकायत भी की थी, लेकिन कार्रवाई के बजाय मामले को दबा दिया गया। अब एक बार फिर कुछ पत्रकारों को सिविल लाइन थाने में निशाना बनाया गया है। पत्रकारों में इसे लेकर भारी आक्रोश है, लेकिन अफसोस कि उच्चाधिकारी अब भी चुप्पी साधे हुए हैं।
पत्रकार सुरक्षा सवालों के घेरे में
छत्तीसगढ़ में लगातार पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कभी पत्रकारों की हत्या कर दी जाती है, तो कभी झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया जाता है। अभी तक चर्चित सुशील पाठक हत्याकांड का भी खुलासा नहीं हो पाया है, जो प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
पत्रकारों ने जताया विरोध
इस पूरे प्रकरण के बाद बिलासपुर के पत्रकारों ने विरोध दर्ज कराते हुए मांग की है कि
झूठी एफआईआर की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दोषी थाना प्रभारी पर कार्रवाई हो।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनाया जाए।
- संविधान और लोकतंत्र की हत्या
लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है। लेकिन जब पत्रकार ही असुरक्षित होंगे और प्रशासन पैसे और दबाव में आकर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करेगा, तो संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जाएगा।
अब देखना होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन पत्रकारों की इस गंभीर मांग पर कब तक खामोश रहता है।
