हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी।
बिलासपुर | रोशनी न्यूज :-
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत आरक्षित सीटों में भारी कटौती और निजी स्कूलों द्वारा की जा रही अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा पेश किए गए हलफनामों में विरोधाभास पाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है।
📉 RTE सीटों का गणित: आंकड़ों में उलझी सरकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवरशी ठाकुर ने न्यायालय को बताया कि सत्र 2021-22 में RTE के तहत 83,006 सीटें उपलब्ध थीं, जो सत्र 2023-24 में घटकर मात्र 55,266 रह गईं। लगभग 28,583 सीटों की इस कमी पर राज्य सरकार ने तर्क दिया कि RTE केवल 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए है, इसलिए प्री-प्राइमरी स्तर पर सीटें कम दिख रही हैं। हालांकि, कोर्ट ने सरकारी आंकड़ों में इस भारी अंतर को “विरोधाभासी” मानते हुए शासन को एक विस्तृत और स्पष्ट हलफनामा (Better Affidavit) पेश करने का निर्देश दिया है।
🏫 बिना भवन के मान्यता और ‘नर्सरी’ का खेल
न्यायालय में दुर्ग और रायपुर के कई स्कूलों की पोल खुली:
कागजों पर स्कूल: भिलाई के ‘श्री शंकर विद्यालय’ को लेकर यह तथ्य सामने आया कि स्कूल का कोई भौतिक भवन (Building) अस्तित्व में ही नहीं है, फिर भी उसे मान्यता दी गई।
बिना मान्यता के स्कूल: रायपुर में ‘कृष्णा समूह’ द्वारा संचालित 4 स्कूल (नर्सरी से KG-II) बिना किसी वैध मान्यता के चल रहे हैं।
जुर्माना: अनियमितताओं के चलते ‘नारायण ई-टेक्नो स्कूल’ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
📚 CBSE के नाम पर धोखा और बोर्ड परीक्षा का दबाव
बिलासपुर के ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायण टेक्नो स्कूल से जुड़े मामलों में अभिभावकों के गुस्से का संज्ञान लिया गया। आरोप है कि स्कूलों ने CBSE पाठ्यक्रम का झांसा देकर प्रवेश दिया और भारी फीस वसूली, लेकिन अब छात्रों को अचानक छत्तीसगढ़ बोर्ड (CGBSE) की परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, कक्षा 8वीं तक इन स्कूलों के पास CBSE की मान्यता ही नहीं है।
⚠️ शिकायतों के निपटारे पर ‘झूठा’ दावा?
शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव ने दावा किया कि दुर्ग जिले की 118 शिकायतों में से 77 का निपटारा हो चुका है। हालांकि, हस्तक्षेपकर्ता श्री विकास तिवारी ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेज पेश कर इस दावे को चुनौती दी, जिसमें केवल 7 शिकायतों के निपटारे की पुष्टि हुई। कोर्ट ने इस विसंगति को गंभीरता से लिया है।
⏳ अगली सुनवाई: 8 अप्रैल 2026
कोर्ट ने संयुक्त सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे पाठ्यक्रम विवाद, बोर्ड परीक्षा के अचानक आयोजन और अभिभावकों को दी जा रही धमकियों जैसे गंभीर मुद्दों पर अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करें।
न्यायालय की टिप्पणी: > “जब कोई भवन अस्तित्व में ही नहीं था, तो राज्य किसी विद्यालय को मान्यता कैसे दे सकता है? राज्य का आचरण दर्शाता है कि वह ऐसे विद्यालयों की अवैध गतिविधियों में सहयोग दे रहा है।”

