बोहरा समाज से सीखने की जरूरत… सिंधी समाज में भरोसे का संकट क्यों ?

🔴 बोहरा समाज से सीखने की जरूरत… सिंधी समाज में भरोसे का संकट क्यों ?

📍 बेबाक अंदाज़ | बिलासपुर, 26 जुलाई 2025

बोहरा समाज अपने समाजजनों की तरक्की के लिए बिना ब्याज के कर्ज, सादगी से विवाह और पारदर्शी व्यवस्था की मिसाल बन चुका है। उनके धर्मगुरु सिर्फ प्रवचन नहीं देते, व्यवहार में सुधार और व्यवस्था में विकास की सोच को ज़मीन पर उतारते हैं।

👉 बिना ब्याज के कर्ज — कर्ज-ए-हसना स्कीम:
बोहरा समाज अपने ही फंड से जरूरतमंदों को ब्याज रहित कर्ज देता है। बेटी की शादी हो, व्यापार शुरू करना हो या पढ़ाई — इंसान बैंक या सूदखोरों के चक्कर में न पड़े, यही सोच है।

👉 स्मार्ट कार्ड और डिजिटल पहचान:

सरकार से पहले समाज ने अपने हर व्यक्ति को स्मार्ट कार्ड दिया। वेबसाइट पर हर व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन, ट्रैकिंग और पारदर्शिता — कोई दिखावा नहीं, सिस्टम से सेवा।


अब आइए बिलासपुर के सिंधी समाज की हकीकत पर नज़र डालते हैं:

समाधान योजना या दिखावा योजना?

सिर्फ नाम की योजनाएं, ना पारदर्शिता, ना जवाबदेही!
समाज की बहन-बेटियों के इलाज के लिए दान इकट्ठा नहीं हो पा रहा और दूसरी पंचायतों से मदद माँगने की नौबत आ रही है। यह किसकी नाकामी है?

⚠️ न हिसाब देने की हिम्मत, न नेतृत्व में ईमानदारी !

दान देने वालों का हिसाब नहीं, जिनको दान मिला उनका नाम नहीं — और जब सवाल पूछो तो नोटिस भेजकर दायित्व परिवर्तन की चिट्ठी थमा दी जाती है।

🔥 सिंधी सेन्ट्रल पंचायत का जबरदस्त विरोध !

बिलासपुर में अब सवाल उठ रहे हैं — क्या यह नेतृत्व समाज का है या कुछ खास चेहरों की दुकान बन गई है ?
क्या यह सेवा है या कुर्सी पकड़ने की होड़ ?


📣 सिंधी समाज पूछ रहा है — क्या बोहरा समाज से सीखोगे या यूँ ही शर्मिंदा करते रहोगे ?

➡️ जब दूसरे समाज बिना ब्याज के मदद कर रहे हैं, स्मार्ट कार्ड से व्यवस्था चला रहे हैं, तो सिंधी समाज में सिर्फ भाषण और प्रचार क्यों?
➡️ जवाब चाहिए — कब तक बहनों की मदद के लिए दूसरे शहरों का दरवाज़ा खटखटाया जाएगा?
➡️ कब तक पंचायतें सिर्फ अपने चेहरों को बचाने की राजनीति करती रहेंगी?


अब समय है या तो सुधार का, या विद्रोह का।
परिवर्तन होगा या फिर गुलामी की मानसिकता जीतेगी — ये समाज तय करेगा।

✍️ बेबाक रिपोर्ट | रोहनी न्यूज़ पोर्टल