रोशनी न्यूज़, बिलासपुर
**शहडोल से आया जूता चपल बैचने वाला, रायपुर-बिलासपुर के धुरंधरों को पछाड़ कर बना रियल एस्टेट का नया बादशाह!**
सवाल ?
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रियल एस्टेट की दुनिया में इन दिनों एक नाम तेजी से उभरा है। शहडोल (मध्यप्रदेश) से आकर यहां बसने वाले इस बिल्डर ने अपने दिमाग, सिस्टम मैनेजमेंट और चालाकी से रायपुर के नामी तोमर बंधु और बिलासपुर के पुराने दिग्गज बिल्डरों को पीछे छोड़ दिया है। सवाल ये है कि आखिर कैसे एक बाहरी व्यक्ति ने कुछ ही सालों में इतना बड़ा नेटवर्क और साम्राज्य खड़ा कर लिया ?
अपने ही समाज को चुना लगाने के बाद कॉलोनी वासियों को भी लगाया चुना ।
करोड़ो अरबो का घोटाला करने वाले को कोंन बचा रहा मलाई मिठाईयां या कोई और भी साथ है इसके ?
कोटवारों कि जमनी बेचीं नही जाती है तो अपने नाम कैसे करवा ली बिल्डर ने ?
रामा वैली कॉलोनी के लोगो ने पहली बार शिकायत नही कि है बिल्डर कि नही पहली बार बिल्डर के उपर आरोप लग रहें है , बिल्डर ने ऐसे ही अपना करोड़ो का साम्राज्य नही खड़ा किया है धोखाधड़ी चाल बाजी झूठ और मलाई मिठाई के दम पे बनाया है
जूता-चप्पल बेचने वाले का करोड़ों का घोटाला! समाज और कॉलोनीवासियों को लगाया करोड़ों का चूना
**कई बड़े सवाल खड़े**
– किसके संरक्षण में ये साम्राज्य खड़ा हुआ?
– कितनी शासकीय जमीनें हड़पी गईं?
– कौन-कौन सिस्टम में अंदर से मददगार बने रहे?
– पुराने बड़े बिल्डरों की पकड़ कैसे टूट गई ?
– और सबसे बड़ी बात, शहर के बड़े बिल्डरों और कॉलोनी संचालकों की चुप्पी क्यों है ?
बिलासपुर।
बिलासपुर शहर में एक बिल्डर का नाम इन दिनों सुर्खियों में है। जिस व्यक्ति ने कभी सड़क किनारे जूता-चप्पल बेचे थे, वह आज करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा है। हैरानी की बात ये है कि उसने ये सब समाज और कॉलोनीवासियों के साथ धोखा करके हासिल किया।
सूत्रों के मुताबिक, झूलेलाल मंगलम भवन निर्माण में करोड़ों का गड़बड़झाला किया गया। भवन के निर्माण से लेकर रखरखाव और फंड के हिसाब-किताब तक में हेराफेरी की गई है। रजिस्टार ऑफिस में जमा दस्तावेज़ों में भी भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
कोटवारों की जमीन पर कब्ज़ा !
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ की परंपरा और नियमों के अनुसार कोटवार की जमीन न बेची जा सकती है और न ही नामांतरण किया जा सकता है। बावजूद इसके, बिल्डर ने ऐसी जमीन अपने नाम करा ली और कॉलोनी में प्लॉट बेच डाले।
रामा वैली कॉलोनी में अवैध कब्जे और फर्जी बिक्री
रामा वैली कॉलोनी के रहवासियों ने भी बिल्डर के खिलाफ कई बार शिकायत की है।
जांच में सामने आया है कि:
57,285 स्क्वेयर फीट ग्रीनलैंड में से 37,000 स्क्वेयर फीट पर अवैध निर्माण कर बेच दिया गया।
14.063 एकड़ शासकीय पकड़ भूमि को फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए प्लॉट काटकर बेच दिया गया।
55 और 56 नंबर की सरकारी ज़मीन को निजी संपत्ति बताकर लोगों को धोखे से बेच दिया।
*सवाल उठता है — बिल्डर को कौन बचा रहा है ?*
बिलासपुर में चर्चा है कि इस पूरे घोटाले में मलाई-मिठाई के दम पर कुछ रसूखदार लोग भी बिल्डर के साथ मिले हुए हैं। यही वजह है कि सालों से ये घोटाले दबे हुए थे।
रहवासियों ने की मांग
रामा वैली कॉलोनी के रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि संपूर्ण कॉलोनी का सीमांकन कराया जाए और शासकीय भूमि को तत्काल रिकवर किया जाए। साथ ही, झूलेलाल मंगलम भवन की जांच कराई जाए ताकि समाज के पैसों का सही हिसाब सामने आ सके।
**कब होगा खुलासा?** शहर में चर्चा है कि अगर जमीन की जांच, सीमांकन और पुराने प्रोजेक्ट्स की फाइलें खुल जाएं तो कई चौंकाने वाले राज सामने आ सकते हैं। लेकिन कौन खोलेगा ये फाइलें और कौन करेगा सवाल ?
मलाई मिठाईयां खा कर चुपचाप से पहले जैसे नीद मे रहेंगे ?
प्रशासन की चुप्पी बनी सवाल
अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करता है। क्या बिल्डर के रसूख के आगे कानून भी बौना साबित होगा या सच्चाई को इंसाफ मिलेगा?
