बिलासपुर
श्री झूलेलाल सेवा समिति, बिलासपुर को लेकर एक बार फिर समाज में सवाल उठने लगे हैं। समाज के जागरूक नागरिक ने समिति की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कई गंभीर मुद्दों को सार्वजनिक किया है।
बताया गया है कि दिनांक 15 अप्रैल 2024 को समिति के तत्कालीन अध्यक्ष हरीश भगवानी को एक आवेदन सौंपा गया था, लेकिन आज तक उस आवेदन का कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही उसकी कोई जानकारी आवेदक को दी गई। इससे समाज के लोगों में नाराज़गी और अविश्वास का माहौल बन गया है।
इतना ही नहीं — आवेदन देने के बाद समाज के ही कुछ लोगों द्वारा झूठी शिकायतें एसपी कार्यालय में कराई गईं। आरोप लगाया गया है कि यह शिकायतें सिर्फ इसलिए की गईं क्योंकि आवेदक ने समिति से ऐसा सवाल कर लिया, जिसका जवाब उनके पास था ही नहीं।
जाग उठे कई सवाल —
अब नये अध्यक्ष के चयन के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि वे पुराने लंबित मामलों पर ध्यान देंगे और पारदर्शिता लाएंगे।
समाज के बीच अब कुछ अहम सवाल उठ रहे हैं:
झूलेलाल सेवा समिति में चुनाव क्यों नहीं कराए जाते ?
समिति का नियम और बायोलॉजी सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते ?
आखिर समिति की स्थापना की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या सेंटरल पंचायत झूलेलाल मंगलम भवन का संचालन नहीं कर पा रही थी ?
क्या समिति केवल 73 सदस्यों की है? बाकी बिलासपुर के 16 वार्ड में बसे सिंधी समाज के लोगों का कोई अधिकार नहीं ?
भवन निर्माण में पूरे समाज का चंदा लिया गया तो फिर उसका उपयोग समाज के हर वर्ग को क्यों नहीं मिल पाता ?
भवन का किराया ₹1 लाख या उससे अधिक क्यों? क्या समाज की संपत्ति को महज कुछ गिने-चुने लोगों तक ही सीमित रखना सही है ?
समाज में गहराया असंतोष —
सोशल मीडिया के इस युग में समाज का जागरूक वर्ग अब सवाल पूछ रहा है कि क्या नये अध्यक्ष इन गंभीर विषयों पर मंथन करेंगे या वही पुरानी परंपरा चलेगी, जहां कुछ चुनिंदा लोग समाज की संपत्ति और व्यवस्था को अपनी सुविधा अनुसार चलाते रहेंगे।
क्या बोले नये अध्यक्ष ?
इस पूरे मामले पर नये अध्यक्ष की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। समाज अब पारदर्शिता और जवाबदेही चाहता है।
समाज का कहना है —
“झूलेलाल मंगलम भवन पूरे सिंधी समाज की संपत्ति है, किसी व्यक्ति या गुट विशेष की नहीं। समाज में समानता और सबका हक है, ये अब सुनिश्चित होना चाहिए।”
रिपोर्ट —[ रोशनी न्यूज़ ]
बिलासपुर।
