📌 सवाल सीधा है: सेन्ट्रल पंचायत और सिंधी युवक समिति जैसी संस्थाएं क्यों समाज के उन लोगों को मतदान का अधिकार नहीं देतीं ?
वार्ड पंचायतों में हर सदस्य को मतदान का अधिकार मिलता है, तो फिर
सेन्ट्रल पंचायत और सिंधी युवक समिति जैसी संस्थाएं क्यों समाज के उन लोगों को मतदान का अधिकार नहीं देतीं, जो समाज के लिए बंध्यान (200, 500 या उससे ज्यादा) देकर अपनी सदस्यता निभा रहे हैं?
📌 क्या हो रहा है बिलासपुर में ?
किसी वार्ड में ₹200, किसी में ₹500 की बंध्यान ली जाती है
उसी रकम से भवन, आयोजन और समाजिक कार्यों में खर्च किया जाता है
लेकिन जब सेन्ट्रल पंचायत या सिंधी युवक समिति का चुनाव आता है, तो सिर्फ कुछ गिने-चुने लोगों को ही अधिकार दिया जाता है
आम सदस्य, जो पैसा भी दे रहा और समाज के आयोजनों में भी भाग ले रहा — उसे वोट डालने का अधिकार नहीं
📌 क्यों नहीं दिया जा रहा ?
👉 क्योंकि ये दोनों संस्थाएं अभी निजी स्वार्थ और अपने वर्चस्व को बनाए रखने के लिए नियमों का दुरुपयोग कर रही हैं
👉 इन्हें डर है कि अगर आम सदस्य वोट करेगा, तो उनकी एकाधिकार वाली कुर्सी छिन जाएगी
👉 समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही खत्म हो जाएगी, इसलिए वो आम समाज को जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया से दूर रखते हैं
📌 इससे नुकसान क्या हो रहा है?
योग्य, ईमानदार और समाजसेवी लोगों को मौका नहीं मिल रहा
वही पुराने चेहरों का वर्चस्व बना हुआ है
समाज की मूल समस्याएं, भवन के हिसाब-किताब, बंध्यान की पारदर्शिता — सब सवालों से बचा जा रहा है
समाज के अंदर भेदभाव और मनमानी को बढ़ावा मिल रहा है
📌 अब क्या होना चाहिए ?
✅ समाज के सभी बंध्यानधारी सदस्यों को सेन्ट्रल पंचायत और सिंधी युवक समिति में मतदान का अधिकार मिलना चाहिए
✅ समाज का संविधान या बाई-लॉज़ सार्वजनिक होना चाहिए
✅ सदस्यता शुल्क लेने के बाद मतदान अधिकार देना अनिवार्य किया जाए
✅ चुनाव की तारीखें, वोटर लिस्ट और प्रक्रिया पारदर्शी रूप से घोषित हो
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📢 आपकी आवाज ही समाज की ताकत है।
