संपादकीय लेख : –
बिलासपुर में सिंधी समाज के लिए एक भव्य भवन का निर्माण कराया गया। इस भवन के निर्माण के लिए समाज के लोगों से खुले दिल से सहयोग लिया गया। किसी ने 11 हज़ार दिए, किसी ने लाखों। किसी ने पूरे कमरे का खर्च उठाया तो किसी ने हाल का। समाज का हर व्यक्ति अपनी हैसियत के अनुसार इस कार्य में भागीदार बना।

पर सवाल ये उठता है —
क्या दान लेने वालों ने उसकी रसीद दी?
सच्चाई ये है कि बहुत लोगों को आज तक रसीद नहीं दी गई। जिनसे रसीद मांगी गई, उन्हें टालमटोल कर या दबाव बनाकर चुप करा दिया गया।
क्या आपको मालूम है उस भवन के लिए जो संविधान बनाया गया है, उसकी प्रति समाज के कितने लोगों के पास है?
ज्यादातर लोगों को इस संविधान की जानकारी ही नहीं। संविधान के नाम पर एक गुट सब कुछ अपने कब्जे में रखे हुए है।
जब कुछ जागरूक लोगों ने इसकी जानकारी मांगनी चाही, तो दान लेने वालों की पूरी गैंग शिकायत करने पहुंच गई।
संगठित तरीके से विरोध की आवाज़ दबाने का प्रयास किया गया।
इस गैंग का सरगना, जो पहले पुराने बस स्टैंड के पास रहता था, फिर रामा वेली गया और अब दूसरी कॉलोनी जाने का प्लान बना रहा है — उसके कारनामे सुनेंगे तो पांव तले ज़मीन खिसक जाएगी।
रायपुर रोड पर जितनी भी कॉलोनियां इसने बनाई हैं, उन सब में गोलमाल है।
आज भी उसके खिलाफ कई मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं।
कुछ साल पहले दूसरे गुट ने जब समाज में अध्यक्ष चुनने की बारी आई, तब पत्रकार से राय ली गई। पत्रकार ने ईमानदारी से एक नाम सुझाया। सबकी रज़ामंदी भी हो गई, कार्यक्रम भी हुआ, और नया अध्यक्ष बन गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
एक गुट, जो पहले से नाराज़ था, उसने मौका देखकर पत्रकार को समिति से बाहर करवा दिया। फिर एक पैसे वाले सेठ को साथ मिला लिया और अपनी ‘चोर गैंग’ बना ली। इस गैंग में पहले से ही लोगो को चूना लगाने वाले मौजूद थे और कुछ नए चेहरे भी जुड़ गए।
आज समाज के साधारण लोग इनकी चालों के शिकार हो रहे हैं।
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निष्कर्ष:
जब तक समाज के लोग
दान का हिसाब नहीं मांगेंगे
संविधान की प्रति नहीं देखेंगे
और संगठित होकर इन गुटबाजों का विरोध नहीं करेंगे
तब तक ऐसे लोग समाज के संसाधनों को अपने निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते रहेंगे।
समाज के ईमानदार, जागरूक और बुद्धिमान लोगों को आगे आना होगा।
वरना आने वाली पीढ़ियां भी इन्हीं स्वार्थी लोगों के जाल में फंसती रहेंगी।
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📌 संदेश :-
दान करिए… पर उसका हिसाब भी लीजिए।
सहयोग करिए… पर उसकी रसीद भी देखिए।
समाज से जुड़िए… पर आँख मूंदकर नहीं।
