📖 लेख विकास रोहरा ✍️
शीर्षक: “सिंधी समाज की खामोशी — कब तक ?”
आज का दौर बड़ा अजीब है।
सिंधी समाज, जो कभी अपनी संस्कारशीलता, एकता और धर्मनिष्ठा के लिए जाना जाता था, आज कहीं न कहीं धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है।
सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि आजकल सिंधी समाज में भी कुछ लोग पिता की बहन की बेटी से विवाह जैसे अनैतिक और सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध रिश्ते कर रहे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं होता था। हमारे बुजुर्गों ने तो हमें सिखाया था कि खून के रिश्ते की मर्यादा और धर्म का पालन करना ही असली धर्म है।
लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि बुद्धिमान, पढ़े-लिखे, समाजसेवी और जिम्मेदार लोग आज खामोश बैठे हैं। कोई विरोध नहीं, कोई बैठक नहीं, कोई समाजिक निर्णय नहीं।
दूसरी ओर, लव जिहाद और धर्मांतरण की घटनाएँ भी बढ़ती जा रही हैं।
सिंधी समाज की बेटियाँ बहकावे में आकर अपना धर्म, कुल और परिवार सब कुछ त्याग रही हैं। समाज केवल तमाशबीन बना हुआ है। कोई गंभीर कदम नहीं, बस सोशल मीडिया पर अफसोस जताने की रस्म।
कुछ लोग धर्म के नाम पर धन संग्रह और दिखावटी आयोजन में लगे हैं।
सच्चे संतों, समाजसेवकों और धार्मिक गुरुओं को पीछे कर दिया गया है।
जो लोग सही बोलते हैं, सच्चाई सामने लाते हैं — उन्हीं पर झूठे मुक़दमे, दबाव और तिरस्कार थोप दिया जाता है।
❓ आखिर ये खामोशी क्यों?
क्या सिंधी समाज अब सिर्फ पैसा कमाने और व्यवस्था में सेट होने तक सीमित रह गया है?
क्या हमारे समाज का नेतृत्व अब धर्म, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा छोड़, केवल रोटियाँ सेकने और गुटबाज़ी करने में व्यस्त है?
समाज के सच्चे सेवक कहाँ हैं ?
युवा संगठनों में जोश और बदलाव की लहर क्यों नहीं है?
क्यों आज कोई आगे आकर सामाजिक कुरूतियों के खिलाफ मोर्चा नहीं खोल रहा?
📌 अब भी समय है।
अगर हम आज भी सच्चाई के पक्ष में आवाज़ नहीं उठाएंगे,
तो कल अपने ही घरों की बेटियों को बचाने वाला कोई नहीं होगा।
सिंधी समाज को चाहिए कि वो
सामूहिक बैठकें करे
युवा वर्ग को संस्कार और धर्म की शिक्षा दे
धर्मांतरण, लव जिहाद और अनैतिक विवाह पर कड़ा फैसला ले
और धर्म के नाम पर व्यापार करने वालों का बहिष्कार करे।
📢 सिर्फ एक बात याद रखिए —
“जो समाज अपनी बेटियों और परंपराओं की रक्षा नहीं कर सकता, वो समाज इतिहास में अपनी पहचान खो देता है।”
✍️ लेखक: (विकास रोहरा ✍️ से )
