*सिंधी सेंट्रल पंचायत चुनाव में ‘सूची की सर्जरी’ और ‘पते का जादू’ — मुरलीधर वाधवानी ने खोला बड़ा मोर्चा*
बिलासपुर। पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत, बिलासपुर के चुनाव से पहले ही मतदाता सूची और प्रत्याशियों की पात्रता को लेकर बवाल मच गया है। अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मुरलीधर वाधवानी ने मुख्य चुनाव अधिकारी वी.के. खत्री को सौंपी आपत्ति में ऐसे आरोप लगाए हैं, जो चुनावी पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़े करते हैं।
वाधवानी का आरोप है कि मतदाता सूची में ‘जादू’ चलाकर मतदाताओं के पते बदल दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर—
मतदाता क्रमांक 419 की सूची में अनिल भोजवानी मोबइल नंबर 7869158700 को जूना बिलासपुर का निवासी दिखाया गया है, जबकि हकीकत में वे कश्यप कॉलोनी के रहने वाले और पूज्य सिंधी पंचायत कश्यप कॉलोनी के सदस्य हैं।
वहीं, सबसे बड़ा हमला उन्होंने अध्यक्ष पद के एक और प्रत्याशी कैलाश मलघानी पर किया।
वाधवानी का कहना है कि मलघानी ने नामांकन फार्म में खुद को पूज्य झूलेलाल साई सिंधी पंचायत मंगला का सदस्य बताया है, जबकि आधार कार्ड में उनका पता खपरगंज दर्ज है, जो पूज्य सिंधी पंचायत शनिचरी पड़ाव के अधिकार क्षेत्र में आता है।
वाधवानी का तंज— “अगर पता बदलने से पंचायत बदल सकती है, तो कल को वार्ड भी बदल जाएंगे और वोट भी!”
यही नहीं, वाधवानी ने तीन बड़े संगठनों को मतदान अधिकार से वंचित रखने पर भी सवाल उठाए—
1. भारतीय सिंधु सभा बिलासपुर शाखा — 50 साल से सिंधी भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय।
2. पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत युवा विंग — सक्रिय सामाजिक और युवा संगठन।
3. सिंधी युवक समिति बिलासपुर — 50 वर्षों से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों में अग्रणी, साथ ही सिंधी विद्या मंदिर का संचालन।
उन्होंने मांग की कि 17 वार्डों के सभी सदस्यों की सदस्यता शुल्क रसीदें क्रमांक सहित सार्वजनिक की जाएँ, ताकि “सदस्यता सिर्फ कागजों में ही न हो, हकीकत में भी साबित हो।”
वाधवानी का साफ कहना है— “यह चुनाव किसी कुर्सी का नहीं, समाज की साख का है। अगर गड़बड़ियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इतिहास में यह चुनाव एक धब्बा बनकर दर्ज होगा।”
अब देखना है कि मुख्य चुनाव अधिकारी इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या सच में मतदाता सूची और पते का यह खेल उजागर होगा या चुनावी धूल में दब जाएगा।