सेन्ट्रल पंचायत चुनाव पर गरमाया माहौल — नामांकन से लेकर मनोनयन तक उठे सवाल // ✍️ वरिष्ठ समाजसेवी अशोक बजाज का बड़ा बयान

🗞️ सेन्ट्रल पंचायत चुनाव पर गरमाया माहौल — नामांकन से लेकर मनोनयन तक उठे सवाल

📍 बिलासपुर, 23 जुलाई 2025 | रोशनी न्यूज़ पोर्टल रिपोर्ट

बिलासपुर की सेन्ट्रल सिंधी पंचायत के आगामी चुनाव को लेकर शहर में चर्चाओं और विरोध के स्वर तेज़ हो गए हैं। जहां एक ओर विनोद मेघानी का नाम पंचायत की ओर से दावेदार के रूप में सामने आ रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के वरिष्ठ और सेवाभावी लोगों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप भी लग रहा है।

✍️ वरिष्ठ समाजसेवी अशोक बजाज का बड़ा बयान

> “हमें किसी भी दावेदार से व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। मेघानी जी अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन उनसे अधिक अनुभवी, समाजसेवा में अग्रणी लोग भी हैं – हरिश भागवानी, महेश पमनानी, बृजलाल नागदेव, मुरलीधर वाधवानी – इन नामों को पीछे क्यों किया जा रहा है?”

 

बजाज के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पंचायत नेतृत्व के चयन में निष्पक्षता बरती जा रही है या केवल चुनिंदा चेहरों को ही आगे लाया जा रहा है।

📌 एवजी मेंबर और सलाहकार पर भी बवाल

सूत्रों के अनुसार, जूना बिलासपुर के अध्यक्ष ने एक व्यक्ति को सलाहकार और एवजी मेंबर के तौर पर नामित किया था, जिसे सेन्ट्रल पंचायत द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।

अशोक बजाज ने इसके जवाब में कहा:

> “ऐसा पहले भी होता रहा है। नंदलाल चौधरी ने गोपीचंद रेलवानी को और रूपचंद दौड़वानी ने पीतम नागवानी को अपनी टीम में लिया था। तब किसी ने सवाल नहीं उठाया था। अब क्यों हो रहा है विरोध ? सब बिलासपुर और समाज के ही लोग हैं।”

 

❗ लोकतंत्र का सवाल: आम नागरिक क्यों वंचित ?

समाज में तीव्र असंतोष इस बात को लेकर भी है कि वार्ड अध्यक्षों को तो चुना जाता है, पर सेन्ट्रल पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव बंद कमरे में क्यों होता है ?

अशोक बजाज ने कहा:

> “15-20 साल पहले आम चुनाव होता था, सबको वोट देने का अधिकार था। अब डर है कि इनका चेहरा कोई नहीं पहचानता, कोई काम नहीं किया तो वोट कैसे मिलेगा? इसलिए अपने अध्यक्षों से अपने आदमी को जितवाते हैं। हम सिंधी कॉलोनी में रहते हैं, मगर आज तक हमें कभी वोट देने का हक नहीं मिला।”

🔍 बड़ा सवाल यह है कि...

क्या सेन्ट्रल पंचायत में नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी है ?

क्या समाजसेवा करने वाले वरिष्ठ लोगों को दरकिनार किया जा रहा है ?

क्या सिंधी समाज के आम व्यक्ति को पंचायत नेतृत्व चुनने का हक नहीं होना चाहिए क्या ?

👉 समाज जवाब मांग रहा है, अब नेतृत्व को जवाब देना होगा।

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✍️ रिपोर्ट: रोशनी न्यूज़ पोर्टल संपादकीय टीम