बिलासपुर की पत्रकारिता पर सवाल — कब खत्म होगी चाटुकारिता और दलाली की राजनीति?
बिलासपुर।
एक समय था जब पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, लेकिन आज बिलासपुर की पत्रकारिता में जो हालात देखने को मिल रहे हैं, वो शर्मनाक और चिंताजनक हैं। प्रेस क्लब हो या स्वतंत्र पत्रकार समूह — हर जगह चाटुकारों और दलालों का कब्ज़ा है। कुछ ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकारों की आवाज़ को या तो दबा दिया जाता है, या फिर झूठे केस और धमकियों के ज़रिये चुप करा दिया जाता है।
30 हज़ार की दलाली, झूठी FIR और पत्रकारों की गद्दारी
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कुछ समय पहले बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक पत्रकार के खिलाफ झूठे आरोपों में FIR दर्ज कराई गई। हैरानी की बात यह थी कि वही पत्रकार जो कभी साथ बैठते थे, वो 30 हज़ार की डील करवाने लगे। कहा गया — “30 हज़ार दो, FIR नहीं होगी।” और जब पत्रकार ने समझौता करने से इनकार किया, तो उसी रात झूठे आरोपों में उसे जेल भेज दिया गया।
इतना ही नहीं, जब कुछ सच्चे और ईमानदार पत्रकार उसका साथ देने आगे आए, तो उन पर भी दबाव बनाया गया। उन्हें धमकाया गया कि अगर ज्यादा बोलोगे, तो तुम्हारे ऊपर भी केस कर दिया जाएगा।
कब तक चलेगा चाटुकारिता और गुटबाजी का खेल?
बिलासपुर में प्रेस क्लब और पत्रकार संगठनों में वही लोग हावी हैं, जो सत्ता, पुलिस और नेताओं की दलाली में लगे हैं। ये लोग अपने मतलब के लिए झूठ को सच और सच को झूठ बना देते हैं। कई पत्रकार न्यूज़ पोर्टल बनाकर वसूली और सेटिंग का कारोबार चला रहे हैं।
सवाल ये है कि:
- खुद को बड़ा पत्रकार कहने वाले लाखों का खर्चा कहाँ से चला रहे हैं?
- कौन अफसर, कौन नेता, कौन कबाड़ी इनका खर्चा उठा रहा है?
- पत्रकारिता के नाम पर वसूली करने वालों के खिलाफ अब तक जाँच क्यों नहीं हुई?
- बिलासपुर के पत्रकारों में इतनी खामोशी क्यों है?
जांच और सार्वजनिक चर्चा होनी चाहिए
अब वक्त आ गया है कि बिलासपुर के पत्रकार इस गंदगी के खिलाफ आवाज़ उठाएं।
प्रेस क्लब, पत्रकार संगठन और जिला प्रशासन से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि बिलासपुर में पत्रकारिता के नाम पर कब तक दलाली और चाटुकारिता का खेल चलता रहेगा?
कौन लोग हैं जो पत्रकारिता की आड़ में कारोबार कर रहे हैं? उनकी संपत्ति और कमाई का स्रोत क्या है?
पत्रकार पत्रकार होता है — दलाल नहीं
हर पत्रकार न दलाल है, न मुखबिर। पत्रकार वो है जो सच के लिए खड़ा हो, चाहे कितनी भी ताकतवर सत्ता उसके खिलाफ हो। बिलासपुर के ईमानदार पत्रकारों को अब एकजुट होकर इन दलालों और चाटुकारों को बेनकाब करना होगा। वरना आने वाली पीढ़ियां पत्रकारिता को धंधा और दलाली का अड्डा ही मानेंगी।
