बिलासपुर।
एक कार्यक्रम के दौरान सिंधी संत साई लाल दास ने समाज की वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए बेहद मार्मिक और सटीक बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘‘मुसलमानों को यह कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती कि खुदा को मानो, ईसाइयों को नहीं कहना पड़ता यीशु मसीह को मानो, सिखों को नहीं कहना पड़ता गुरुनानक को मानो। लेकिन सिंधी समाज अपनी असली पहचान और भगवान झूलेलाल को भूलता जा रहा है।’’
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ‘‘सिंधी समाज आज पंथों में बंट चुका है। अपनी पहचान, अपना आईडी कार्ड — भगवान झूलेलाल — को भूलकर समाज में टांग खिंचाई और बँटवारे में लगा है।’’
साई लाल दास ने समाज की दो सबसे बड़ी कमियाँ भी बताईं:
1. पहचान का अभाव — समाज के लोग अब भगवान झूलेलाल को अपनी असली पहचान मानना भूल गए हैं। समाज की एकजुटता और संस्कृति भगवान झूलेलाल के नाम पर ही टिक सकती है।
2. टांग खिंचाई और बँटवारा — लोग अब समाज का भला करने के बजाय एक-दूसरे को गिराने और अपने-अपने स्वार्थ साधने में लगे हैं। इससे समाज का नाम भी खराब हो रहा है और नई पीढ़ी भी इससे दूर होती जा रही है।
उन्होंने अपील की कि समाज को अब एकजुट होकर भगवान झूलेलाल की पहचान को सहेजना होगा, वरना समाज सिर्फ गुटों और झगड़ों में बंट कर रह जाएगा।
कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों लोगों ने भी उनकी बात का समर्थन किया और इस पर विचार करने की बात कही।
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📌 सम्पादकीय टिप्पणी:
साई लाल दास का यह बयान सिर्फ एक संत की पीड़ा नहीं, बल्कि हर उस सिंधी की आवाज़ है जो समाज को टूटते और अपनी संस्कृति को मिटते देख रहा है। अब वक़्त है कि समाज के लोग इस बात को गंभीरता से लें और सिंधियत और भगवान झूलेलाल की असली परंपरा को फिर से मजबूत करें।
